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उम्मीदों की ज्योति जलाएगा

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तेरा भी एक दिन आएगा,मेरा भी एक दिन आएगा
घना तिमिर हो,कठिन डगर हो,
फिर भी सब छँट जाएगा
कितना भी कोशिश कर ले,
कारागार कृष्ण को रोक न पायेगा
करने पाप का अंत ,रामसेतु बनाया जाएगा ।

रावण का भी वध होगा ,कंस भी मारा जाएगा
अमावस्या की काली रात के बाद ,
फिर नया उजाला आएगा,
नया उजाला नई सोच और नई ऊर्जा ले के आएगा।

मन के विकारों को हर के,उम्मीदों की ज्योति जलाएगा,
जो मिला उसका अभिमान ना कर, एक दिन सब मिट जाएगा,
नित नए पटल पर ,नई ईबारत लिखी जाएगी,
तेरा भी एक दिन आएगा,मेरा भी एक दिन आएगा ।

―अमित गौतम “ऋषि “
रीवा

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