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जनरल असीम मुनीर के पलटवार से खत्म होने की कगार पर PTI, पाकिस्तान में इमरान खान के राजनीतिक करियर का अंत ?

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इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुसीबतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। 25 अप्रैल 1996 को इमरान ने बड़े अरमानों के साथ पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की शुरुआत की थी। साल 2018 में जब वह पहली बार पीएम बने तो उनका एक मकसद भी पूरा हो गया। लेकिन अब लगता है कि उनकी पार्टी बस कुछ ही समय की मेहमान है। मंगलवार को उनकी पार्टी की सीनियर नेता शिरीन माजरी ने पार्टी छोड़ी तो बुधवार को फवाद चौधरी ने भी इसे अलविदा कह दिया। पूर्व वित्‍त मंत्री असद उमर भी पार्टी छोड़ रहे हैं। इस सारे घटनाक्रम को देखने के बाद विशेषज्ञों ने अब इमरान के राजनीतिक करियर पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

अब तक कितनों ने छोड़ा साथ
पीटीआई से अब तक डॉक्टर शिरीन माजरी, फैयाजुल हसन चौहान, मलिक अमीन असलम, महमूद मौलवी, आमिर कयानी, जय प्रकाश, आफताब सिद्दीकी और संजय गंगवानी सहित कई नेता जा चुके हैं। पूर्व प्रसारण मंत्री और पार्टी के प्रवक्‍ता रहे फवाद चौधरी ने जहां राजनीति से ब्रेक का हवाला दिया तो शिरीन ने स्वास्थ्य और बेटी इमान मजारी का हवाला देते ही पीटीआई को अलविदा कह दिया।

माइकल कुगलमन जो विल्‍सन सेंटर में साउथ एशिया इंस्‍टीट्यूट के डायरेक्‍टर हैं उनकी मानें तो पार्टी के एक और नेता फवाद चौधरी ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। साफ है कि पार्टी के लिए अब सारे रास्‍ते बंद हो रहे हैं। पीटीआई के दो दर्जन से ज्यादा नेता निकल चुके हैं। लेकिन आखिर में पीटीआई इमरान खान हैं और इमरान खान ही पीटीआई हैं। अगर वह जेल जाते हैं, तो पार्टी का अस्तित्‍व भी संकट आ सकता है।

तो क्‍या खत्‍म हो जाएगी पीटीआई
उनकी मानें तो ऐसे में मुद्दा यह होगा कि पार्टी का बड़ा जनाधार क्या है। इमरान खान अगर जेल जाते हैं तो लंबे समय तक जनाधार बचा रहेगा, ऐसा मुश्किल है। फिर कौन होगा जो इस खाली जगह को भरेगा? कुछ और विशेषज्ञों की मानें तो जिस तरह से नेता पार्टी से जा रहे हैं वह तरीका न सिर्फ पीटीआई को कमजोर करेगा बल्कि पाकिस्‍तान के लिए भी खतरा साबित होगा। वहीं इमरान का कहना है कि ‘बंदूक की नोक पर’ उनके नेताओं का पार्टी से ‘जबरन तलाक’ कराया जा रहा है। कुछ लोग मान रहे हैं कि पीटीआई को तोड़कर एक अलग गुट बनाने की कोशिशें जारी हैं। यह ठीक उसी तरह से है जैसे कभी जैसे पीएमएल-एन को तोड़कर पर रातोंरात पीएमएल-क्यू पार्टी बना दी गई थी।
क्‍या हुआ था नवाज के साथ
जानकारों की मानें तो जनरल असीम मुनीर ने वही चाल चली है जो कभी परवेज मुशर्रफ ने चली थी। आज पाकिस्‍तान में जो स्थिति है वही उस समय थी जब मुशर्रफ ने तख्‍तापलट किया था। मुर्शरफ ने पूर्व पीएम नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) को तोड़ने में सफलता हासिल की थी। मुशर्रफ ने जब तख्‍तापलट को अंजाम दिया तो नवाज की पार्टी के कई नेताओं ने उनका साथ छोड़ दिया था।

सन् 1997 में जब आम चुनाव हुए तो नवाज के अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं से मतभेद हो गए। मुशर्रफ ने इसी बात को परखा और पार्टी को तोड़ दिया था। साल 2002 में असंतुष्‍ट पार्टी नेताओं ने मुशर्रफ से मुलाकात की जो उस समय राष्‍ट्रपति बन चुके थे। 20 जुलाई 2002 को पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग-क्‍यू (PML-Q) की शुरुआत हुई। बाद में यह पार्टी मुशर्रफ की सरकार का एक अभिन्न हिस्‍सा बन गई।

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