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10 लाख करोड़ का बिजनस कोई 30-40 हजार करोड़ में क्यों नहीं लेना चाहेगा… सुभाष चंद्रा ने सुनाया Zee का अनसुना किस्सा

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नई दिल्‍ली: जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) के संस्‍थापक डॉ सुभाष चंद्रा ने समूह से जुड़े कई राज खोले हैं। उन्‍होंने बताया है कि क्‍यों दुनियाभर के निवेशकों की नजर ग्रुप पर लगी रहती है। उन्‍होंने ग्रुप की तुलना उस सुंदर लड़की से की है जिसके पीछे बहुत लड़के लगे रहते हैं। सुभाष चंद्रा ने यह भी बताया है कि बिजनस में उनसे कई गलतियां हुई हैं। हालांकि, इसका उन्‍हें अफसोस नहीं है। उनके मुताबिक, अगर आज उनके ग्रुप को बार-बार टेकओवर करने की कोशिश होती है तो उसके पीछे वजह है। वह मानते हैं कि ग्रुप की बाजार हैसियत भले 30-40 हजार करोड़ रुपये के आसपास है। लेकिन, इसे आज की तारीख में 10 लाख करोड़ रुपये खर्च करके भी खड़ा नहीं किया जा सकता है। यह सिर्फ हो गया है। दोबारा नहीं हो सकता है। चंद्रा ने स्‍वीकार किया है कि उन्‍होंने कारोबार की शुरुआत नियम-कायदों पर अक्षरश: चलकर नहीं की। इसके पीछे उन्‍होंने तब की पॉलिसियों को कारण बताया। उनके मुताबिक, अब युवाओं को ऐसा करने की जरूरत नहीं है। चंद्रा के मुताबिक, अगर वह इतने सारे बिजनस में हाथ में डाल पाए तो उसका सिर्फ एक कारण था। उन्‍होंने हर वक्‍त आंख-कान खुले रखे।

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) को टेकओवर की कोशिशें होती रही हैं। समूह के मुखिया डॉ सुभाष चंद्रा ने अब इसके पीछे की पूरी कहानी बताई है। उन्‍होंने कहा है कि ZEEL की वैलुएशन बेशक 30-40 हजार करोड़ रुपये है। लेकिन, इसे 10 लाख करोड़ रुपये में भी खड़ा नहीं किया जा सकता है। ऐसा बस हो गया है। इसके पीछे बहुत से कारण थे। इनमें स्थितियां भी जिम्‍मेदार थीं। यही कारण है कि उनके कारोबार पर पूरी दुनिया की नजर रही है। एक इंटरव्‍यू में वह बोले कि लड़की सुंदर होती है तो उसके पीछे बहुत लड़के आते हैं। उनके ग्रुप की यही स्थिति है। ऐसे में भला कौन 10 लाख करोड़ रुपये का बिजनस 30-40 हजार करोड़ में नहीं चाहेगा।

कौन था टेकओवर के पीछे?
सुभाष चंद्रा ने बताया कि जी को हथियाने की कोशिश में बहुत लोग थे। इनवेस्‍को के अलावा उसके सपोर्टर भी पीछे से इसमें लगे हुए थे। वे पूरी तरह से कारोबार का अधिग्रहण करना चाहते थे। लेकिन, वह इसे बचाने में कामयाब रहे। सोनी के साथ विलय पर उन्‍होंने कि वे पार्टनर हैं। बेशक, उसके पास मेजॉरिटी शेयर हैं। लेकिन उससे फर्क नहीं पड़ता है। अपनी हिस्‍सेदारी के 41 फीसदी से घटकर 4 फीसदी पहुंचने पर उन्‍होंने कहा कि इसमें आगे सुधार होगा। इनवेस्‍को को लेकर उन्‍होंने कहा कि जब वे टेकओवर नहीं कर सके तो उनकी दिलचस्‍पी खत्‍म हो गई। वह काफी पहले किसी को कंपनी में अपने शेयर बेच चुकी है। जिसे उसने ये शेयर बेचे, चूंकि वह भी टेकओवर नहीं कर सका तो उसका भी इंटरेस्‍ट खत्‍म हो गया। वे जी पर कंट्रोल चाहते थे, जब ऐसा नहीं कर सके तो उन्‍होंने शेयर बेचने शुरू कर दिए।
एनडीटीवी में अडानी ग्रुप की एंट्री मामले पर भी सुभाष चंद्रा बोले हैं। उन्‍होंने कहा है अगर वह इतने बड़े ग्रुप होते तो इसमें हाथ नहीं डालते। उन्‍होंने अपने कारोबारी सफर का भी जिक्र किया है। उन्‍होंने कहा कि जितना वह पा चुके हैं, उसकी उम्‍मीद कभी नहीं की थी। हिसार से 17 साल की उम्र में जब वह दिल्‍ली आए तो उनके सामने संभावनाओं का समंदर था। उन्‍होंने इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बिजनस में हाथ डालने को गलती बताई। हालांकि, चंद्रा ने इस विफलता के पीछे कहा कि जिन लोगों पर उन्‍होंने भरोसा किया वे सही नहीं थे।

द‍िग्‍गज कारोबारी ने स्‍वीकार की गलतियां
दिग्‍गज कारोबारी मुताबिक, उन्‍होंने 12 नए वेंचर शुरू किए। इनमें से 6 सफल हुए। 6 फेल हुए। जो 6 सफल हुए उनके बारे में भी लोग कहते थे कि फेल हो जाएंगे। लेकिन, उन्‍हें यकीन था कि सबके साथ ऐसा नहीं हो सकता है। जी के मुखिया ने बताया कि अगर आप हर जगह आंख कान खुले रखते हैं तो आपको समस्‍याएं दिखती हैं। ये समस्‍याएं बिजनस आइडिया देती हैं। पूरे स्‍टार्टअप इकोसिस्‍टम की उपज में यही है।

सुभाष चंद्रा ने स्‍वीकार किया बिजनस में उनकी एंट्री पूरी तरह कानूनी मानकों पर खरी नहीं थी। जी एंटरटेनमेंट जो पहले जी टेलीफिल्‍म थी, उसका जिक्र करते हुए उन्‍होंने यह बात कही। उन्‍होंने कहा कि इसके पीछे उस समय की नीतियां जिम्‍मेदार थीं। इंडियन टेलीग्राफ एक्‍ट में विदेशी सैटेलाइट से देश में प्रसारण की मनाही थी। प्राइवेट सेक्‍टर को सैटेलाइट ओनरशिप पर रोक थी। लालफीताशाही थी। लाइसेंस राज था। हालांकि, अब युवाओं को पॉलिसी में लूपहोल तलाशने की जरूरत नहीं है।

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