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पृथ्वी से भी पुराना है एक उल्कापिंड

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लंदन । ब्रिटेन में मिले एक पुराने उल्कापिंड को लेकर दावा किया गया है कि इसकी उम्र पृथ्वी से भी कहीं ज्यादा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके जरिए धरती पर जीवन की उत्पत्ति का खुलासा हो सकता है। अंतरिक्ष से आए इस पत्थर को धरती का सबसे पुराना उल्कापिंड भी बताया जा रहा है। ईस्ट एंग्लियन एस्ट्रोफिजिकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि यह उल्कापिंड हमारे ग्रह से भी पुराना है। ईरो ने बयान जारी कर बताया कि इस उल्कापिंड को मार्च में इंग्लैंड के ग्लूस्टरशायर में वुडमैनकोट गांव के पास एक ड्राइववे पर खोजा गया था।

इसका वजन 300 ग्राम के आसपास है। इस पत्थर के टुकड़े की उम्र 4.6 अरब साल है, जबकि पृथ्वी की उम्र लगभग 4.54 अरब साल मानी जाती है। ऐसे में इस उल्कापिंड को लेकर वैज्ञानिकों में काफी उत्साह है। लॉफबोरो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बताया कि अंतरिक्ष मलबे का यह अनूठा टुकड़ा इस सवाल का जवाब दे सकता है कि पृथ्वी पर जीवन कैसे शुरू हुआ। लॉफबोरो मैटेरियल्स कैरेक्टराइजेशन सेंटर के शॉन फाउलर ने कहा कि उल्कापिंड का बड़ा हिस्सा ओलिविन और फाइलोसिलिकेट्स जैसे खनिजों से मिलकर बना हुआ है। इस पत्थर की संरचना पृथ्वी पर मिलने वाले किसी भी चीज से अलग है। इसमें हमें कुछ अज्ञात रसायन या भौतिक संरचना के बारे में भी जानकारी मिली है।

पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल होने के साथ ही आसमानी चट्टानें या ऐस्टरॉइड टूटकर जल जाती हैं और कभी-कभी उल्कापिंड की शक्ल में धरती से दिखाई देती हैं। ज्यादा बड़ा आकार होने पर यह धरती को नुकसान पहुंचा सकते हैं लेकिन छोटे टुकड़ों से ज्यादा खतरा नहीं होता। वहीं, आमतौर पर ये सागरों में गिरते हैं क्योंकि धरती का ज्यादातर हिस्से पर पानी ही मौजूद है। अगर किसी तेज रफ्तार स्पेस ऑब्जेक्ट के धरती से 46.5 लाख मील से करीब आने की संभावना होती है तो उसे स्पेस ऑर्गनाइजेशन्स खतरनाक मानते हैं।

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