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चरित्र सुधार कार्यक्रम का धमाल!!

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चरित्र सुधार कार्यक्रम का धमाल
~कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

राजनीति में जब भी ‘समानता’ की बातें आती हैं,तब सभी पालों में सन्नाटा छा! जाता है। सब एक दूसरे के बगले झाँकने पर लग जाते हैं,उन्हें इस बात की प्रतीक्षा रहती है कि – विपक्षी ने कौन सा तीर अपने तरकश में छुपा रखा है? पहले तो उसके तरकश को गोल करने की योजना बनती है। लेकिन जब वह उसी प्रकार असफल हो जाती है,जिस प्रकार सरकारी योजनाएँ दफ्तरों में धूल चढ़ते हुए। सो, पॉलिटिक्स का गेम इण्ट्रेस्टेड बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के इन्वेस्टमेंट के तरीके ढूँढ़कर तीर की काट ढूँढ़कर लीपापोती भी उसी तरह की जाती है,जिस प्रकार नेताओं के भाषण में राजनैतिक शुचिता और जनहित की गलाफाड़ प्रतिस्पर्धा का आयोजन किया जाता है।

ऐशगाह के अड्डों का इन्तजाम कर लिया जाता है :―

वैसे तो पक्ष और विपक्ष सब एक दूसरे के पीछे पागल कुत्ते को मारने के लिए दौड़ी हुई भीड़ की तरह डण्डा लेकर भागते हुए दिखते हैं। लेकिन कुछ मुआमले ऐसे होते हैं जिनमें सबके गठबन्धन-ठगबन्धन होते हैं।

नेतागण बस इतना ध्यान रखते हैं कि कोई किसी के पर्सनल मामले में इण्टरफेयर नहीं करेगा।अपने-अपने मामले में
‘तुम भी सही और हम भी सही’ के सूत्रवाक्य को मानकर ऐशगाह के अड्डों का इन्तजाम कर लिया जाता है। नेताओं की प्रजाति महिलाओं के विकास के लिए भारी-भरकम योजनाएँ-प्रावधान निकालती रहती है,लेकिन सीटों से लेकर तमाम जगह ‘संगति’ का रोल ‘वि’ उपसर्ग लग जाने के कारण विसंगति में परिवर्तित हो चुका है।

सुरा-सुन्दरी के लत-खोरों के फूटे भाग्य को ‘पॉवर पॉलिटिक्स’ की शक्ति ने सञ्जीवनी प्रदान कर दी है :―

हालाँकि समानता वाले नारे को रटने की क्षमता और कुटिलता की दक्षता में अप्रत्याशित वृध्दि हुई है। ऊपर से सौन्दर्य और सुरा के लत-खोरों के फूटे भाग्य को ‘पॉवर पॉलिटिक्स’ की शक्ति ने सञ्जीवनी प्रदान कर दी है। इसीलिए नेतागण समानता स्थापित करते-करते अपनी पार्टी और सरकार में अपनी-अपनी चमत्कारी अँगूठियों को निहायत निजी अँगीठी में तपाकर उसके खरेपन को निखारने के लिए लालायित दिखते हैं।

 

तत्पश्चात उन सभी अँगूठियों में अपने-अपने रत्न जड़कर तथा उस पर अपनी मुहर लगाकर राजनैतिक भागीदारी के सारे पटों को दरियादिली दिखाते हुए,ठीक वैसे ही खोल देते हैं जिस प्रकार अपने घर या होटल के पिछले दरवाजे की कुंडी को।
और अपनी चमक से चमत्कृत करती हुई अँगूठियाँ राजनीति के ओहदों में सुशोभित होती रहती है। उनका यह क्रम चलता रहता है और नेतागणों की अँगूठियाँ क्रमशः रत्न जड़ित होने के उपरान्त बदलती रहती हैं। हालाँकि नेतागणों की इस रंगीन मिजाजी को उनके व्यक्तिगत शौक और रुतबे की ताकत मानकर इसे निजता का सुरक्षित और संविधान सम्मत अधिकार माना जाता है।

 

निशाने पर पार्टी की महिला विंग हैं :―

राजनीति में चरित्र की चिन्ता करने वाले चिन्तातुर लोग इसे भूत – वर्तमान और भविष्य का पर्दे के पीछे वाला चिरकालिक राजनैतिक चरित्र मानते हैं। उनके अनुसार व्यवस्था वही है,बस उसका स्वरूप और नेतागण बदले हैं।अन्तर सिर्फ़ इतना है कि पहले भनक कम लगती थी,और अब भनक लगने में पल भर की देर नहीं लगती। तो अब सौन्दर्योपासक – ‘सुरा-सुन्दरी’ के लिए घर-होटल, फॉर्म हाउस एक करने वालों ने नए-नए कार्यक्रम तय कर लिए हैं। उनके निशाने पर पार्टी की महिला विंग हैं,सो अब वे जनकार्य से अधिक इसमें ज्यादा आकर्षित और तल्लीन दिखते हैं। जब किसी चीज सर्टिफिकेट बँटता है ,तो वे सभी प्रतियोगिता या कार्यक्रम में भाग लेते हैं जिनका मन रहता है और जिनका नहीं भी। इसलिए अब यह हर पार्टी के नेताओं का मुख्य उद्देश्य है। खुशामद और नेतागणों की खुशमिजाजी कब कौन सा परसाद बाँट दे,इस आशा में सभी आशान्वित होकर कर्त्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य में जुटे रहते हैं।

बड़े से बड़े ओहदेदार आजकल गिरे हुए चरित्र को सुधारने का निजी कार्यक्रम लॉन्च कर रहे हैं :―

वैसे राजनीति में चरित्र का शोधपूर्ण प्रमाणपत्र जारी करने वाले बतलाते हैं कि आजकल ‘महिला मोर्चे’ में चरित्र की बहुत डिमाण्ड है।बड़े से बड़े ओहदेदार आजकल गिरे हुए चरित्र को सुधारने का निजी कार्यक्रम लॉन्च कर रहे हैं।

इसके लिए उनके ही आवेदन स्वीकार किए जाते हैं,जो शर्तानुसार मन-बेमन से ‘पॉलिसी’ को अपनाकर अपने सौन्दर्य और नवजात कली की सुगन्ध की भाँति पूरा वातावरण तो नहीं ,लेकिन कमरा जरूर महका दें।

उनके अनुसार इसका राजनीति के कैरियर में बहुत ज्यादा स्कोप है,इसलिए जो अपने चरित्र को ओहदेदारों की लिस्ट में शामिल करना चाहते हैं । उनके लिए महिला मोर्चे में नेत्री बनने और बनवाने के पर्याप्त प्रबन्ध – ‘चरित्रवान राजनैतिक मानसून’ के अनुसार रुझानों में अव्वल माने जा रहे हैं। लेकिन यह सुविधा विशेषतया ‘चरित्र सुधारने’ वालों के लिए ही है।

चरित्रवान बनने के फायदों में कई सारे वीवीआईपी ट्रीटमेंट शामिल हैं:

एक बार बेदाग चरित्र की सर्टिफिकेट सूची में नाम शामिल हो जाए, तब चरित्रवान बनने के फायदों में कई सारे वीवीआईपी ट्रीटमेंट शामिल हैं। सबको धक्कियाते हुए फोटो के मुख्य फ्रेम में जगह से लेकर विविध प्रकार के आर्थिक लाभ और लग्जरी वाहनों ,कई स्टार वाले होटलों में नि:शुल्क सुविधाओं की अप्रत्याशित भरमार तथा ओहदेदारों के नाम पर सिफारिशों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और रिमोट कन्ट्रोलिंग की अमोघ शक्ति प्राप्त हो जाती है।

घरवाली-बाहरवाली’ फिल्म की तर्ज पर :―

सबकी अपनी-अपनी निगाहें और सबके अपने-अपने निशाने होते हैं,इसलिए ‘घरवाली-बाहरवाली‘ फिल्म की तर्ज पर नेतागण अपना-अपना बवाल काटते हुए ‘चरित्र का सर्टिफिकेट’ अपने कर्मठ करकमलों द्वारा बाँटने में मशगूल रहते हैं। चरित्र सुधार कार्यक्रम में ‘पहले आओ-पहले पाओ’ की बजाय – ‘जब आओ-तब पाओ’ की सुनियोजित व्यवस्था होने के कारण अर्हताधारियों के लिए सुअवसर और नेताओं के लिए नई-नई अँगूठियाँ धारण करने की उत्सुकता सदैव बनी रहती है।

कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

~कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

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