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क्वाड आपसी सहयोग को देता है बढ़ावा, दूसरे देशों को कर्ज के जाल में नहीं फांसता : विनय क्वात्रा

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नई दिल्ली । क्वाड को लेकर भारत का नजरिया एकदम साफ और सकारात्मक है। जापान में सोमवार से क्वाड सम्मेलन होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें शामिल होंगे। उनकी जापान रवानगी से पहले भारत ने क्वाड के ‘सकारात्मक और रचनात्मक’ एजेंडे की बात की और कहा कि यह समूह अन्य क्षेत्रों के सिवा बुनियादी ढांचों के निर्माण में आपसी सहयोग को बढ़ावा देता है ना कि दूसरे देशों को कर्ज के जाल में फांसता है।

विदेश सचिव विनय क्वात्रा के बयान में कर्ज पर कर्ज वाली रणनीति का जिक्र बीजिंग के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। दरअसल, चीन को लगता है कि क्वाड का गठन उसे ही किनारे धकेलने के लक्ष्य से किया गया है।

क्वात्रा ने कहा, ‘क्वाड का इन्फ्रास्ट्रक्चर कोऑर्डिनेश ग्रुप क्षेत्र में टिकाऊ और अनिवार्य बुनियादी ढांचों के निर्माण में इस तरह मदद करता है ताकि देश कर्ज के जाल में नहीं फंस जाएं।’ उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लिए प्रस्तावित अमेरिका हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचा योजना पर बातचीत चल रही है। क्वात्रा ने संकेत दिया कि भारत भी इस पहल का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आर्थिक अवसरों का फायदा उठाने के लिए क्वाड कोऑपरेशन का आर्थिक पक्ष काफी महत्वपूर्ण है। क्वात्रा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के जापान दौरे में इस पहलू पर खास ध्यान दिया जाएगा।

साथ ही, भारत सरकार ने गेहूं निर्यात पर अपनी स्थिति फिर से स्पष्ट कर दी। क्वात्रा ने कहा कि निर्यात पर पाबंदी लगाने का मकसद कमजोर देशों का संरक्षण करना है। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्वाड समिट से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। इसी तरह, उनकी जापानी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्रियों क्रमशः फुमियो किशिदा और एंथना अल्बानीज से भी बातचीत होनी है। ऑस्ट्रेलियाई चुनाव में स्कॉट मॉरिसन की हार के बाद लेबर पार्टी के अल्बानीज नए प्रधानमंत्री होंगे। क्वाड में यूक्रेन के हालात पर भी चर्चा होने की काफी उम्मीद है। क्वात्रा ने कहा कि विदेशी ताकतों ने भारत की मंशा की सराहना की है। भारत चाहता है कि यूक्रेन और रूस के बीच बातचीत शुरू हो और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशा जाए।

क्वात्रा से जब यह पूछा गया कि क्वाड में होने वाली बातचीत पर चीन की चाल का कितना असर होगा, क्वात्रा ने कहा कि जब कभी भी क्वाड लीडर्स की मुलाकात होती है तो वो हिंद-प्रशांत क्षेत्र की चुनौतियों और अवसरों पर बातचीत जरूर करते हैं। उन्होंने कहा, ‘द्विपक्षीय संबंधों का एक अलग मुद्दा है लेकिन फिलहाल अजेंडे पर हिंद-प्रशांत से संबंधित मुद्दों पर ही चर्चा होगी।’ चीनी आक्रामकता के मद्देनजर क्वाड क्या सुरक्षा संबंधी भूमिका बढ़ाएगा?

क्वात्रा ने कहा कि लोकतंत्र, बहुलतावाद और बाजार अर्थव्यवस्था के आधारभूत मूल्यों को ध्यान में रखकर ही क्वाड को उचित संदर्भ में आंकना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्वाड हमेशा सरकारात्मक और रचनात्मक अजेंडे को आगे बढ़ाता है जिसमें कोविड और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से निपटने जबकि उभरती तकनीक, बायोटेक, सेमीकंडक्टरों के सप्लाई चेन के डायवर्सिफिकेशन, महत्वपूर्ण साइबर इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आपसी सहयोग को बढ़ावा देने का लक्ष्य शामिल है।

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