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Satna-विंध्य प्रदेश के मुद्दों पर रीवा-शहडोल संभाग के नेताओं का मंथन

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नारायण की अगुवाई में बैठक : भोपाल से भी आए कई पदाधिकारी

सतना – विंध्य प्रदेश के पुनर्गठन के मुद्दे पर रीवा शहडोल संभाग के सभी जिलों की संयुक्त बैठक में दलगत एवं जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर यह संकल्प लिया गया कि इसके लिए संघर्ष कर रहे सभी संगठन एकजुट होकर संघर्ष करेंगे | पूर्व मंत्री वंश मणि वर्मा के मुख्य अतिथि एवं विधायक नारायण त्रिपाठी की अध्यक्षता में विंध्य पुनरोदय मंच की रीवा में संपन्न हुई इस बैठक में सतना,रीवा,सीधी,शहडोल सिंगरौली,अनूपपुर,उमरिया जिले के साथ-साथ भोपाल से प्रदेश संयोजक लाल जी मिश्रा,प्रदेश प्रवक्ता वंदना द्विवेदी सहित कई जमीनी समाजसेवी एवं रिटायर्ड अधिकारी कर्मचारी शामिल रहे |

 

मीडिया प्रभारी छत्रपाल सिंह छत्तू के मुताबित बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री वंशमणि वर्मा ने कहा कि म. प्र. में विलय के बाद हीरा, कोयला , बहुमूल्य खनिज संपदा , बिजली के सर्वाधिक उत्पादन और पूरे प्रदेश का 40 प्रतिशत राजस्व देने के बावजूद विकास और आमजन को सहूलियत के मामले में भेदभाव हो रहा है जबकि विलय के समय इस क्षेत्र के चहुंमुखी विकास की बात की गई थी ।


सभी संसाधनों के बाबजूद यहां के लोगों के पास रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य का अभाव है । नारायण त्रिपाठी ने कहा कि अब इसके लिए जन आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है तभी हम अपने साथ साथ आने वाली पीढी के सुनहरे भविष्य की कल्पना साकार कर सकते हैं | पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने विंध्य के लिये बहुत पहले से संघर्ष कर रहे लोगों की सराहना करते हुए कहां कि अब नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व ने विंध्य पुनर्निर्माण की बात विंध्य के घर- घर से उठने लगी है । वरिष्ठ समाजसेवी मुनेंद्र तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सबकुछ हमारा होते हुए भी हम ही लोग बुनियादि जरूरतों के लिए भटक रहे हैं और कोई सुनने वाला नहीं है | ऐसे में पृथक विंध्य ही एकमात्र ऐसा विकल्प है जिसको गठन के बाद हमें किसी सो हांथ फैलाना नहीं पडेगा | वरिष्ठ समाजसेवी विनोद शुक्ला ने कहा कि विंध्य एक ऐसा क्षेत्र है जिसे राष्ट्रीय गीत को रचयिता वंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था विंध्य हिमांचल यमुना गंगा | इस गीत की इस लाइन से जाहिर है कि सबसे पहले हमारा विंध्य जिसे हम लेकर रहेंगे | वरिष्ठ अधिवक्ता घनश्याम सिंह ने कहा कि सविधा संसाधनो के मामले में सरकार चाहे जिसकी रही हो हमारे इस क्षेत्र को हमेशा उपेक्षा का सामना करना पडा है और आज भी यही स्थिति बनी हुई है किंतु हम सारे लोग केवल कागजों में लडते रहे तो इस क्षेत्र की जनता के साथ अब अन्याय होगा ,जरूरत जमीनी संघर्ष करने की है |

 

इस अवसर पर घनश्याम पाठक, राकेश गौतम, लालजी मिश्रा, विनायक मिश्रा, राजेंद्र पांडे, राजेश पांडे, श्रीमती वंदना द्विवेदी, तुलसी प्रसाद पांडे वरिष्ठ अधिवक्ता सीधी, उदय कमल मिश्रा, राकेश चतुर्वेदी, भूपेंद्र पांडे, भूपेंद्र सिंह, सतना से सुधाकर सिंह, विवेक अग्रवाल, एच एन सिंह , ददोली पांडे ,रीतेश त्रिपाठी, राजेश दुबे, भूपेन्द्र खरे, रमेश द्विवेदी,आशुतोष सिंह, अंचल अग्रवाल,हरीश द्विवेदी, आदि विशेष रूप से उपस्थित थे ।

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