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मिली थी उम्र कैद, अच्छे आचरण ने कराया आजाद:स्वतंत्रता दिवस लाया आजादी का पैगाम, सेंट्रल जेल सतना से रिहा हुए 20 बंदी

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गुनाह किया तो अदालत ने उम्र कैद की सजा सुना कर जेल भेजा, लेकिन जेल की चार दीवारियों ने न केवल अपराध बोध कराया बल्कि गलतियों और आचरण में सुधार का अवसर दिया। नतीजतन आचरण की जिस बुराई ने गुनाहगार बनाया उसी आचरण की अच्छाई ने रिहाई के रास्ते खोल दिए। सरकार ने सजा माफ की और स्वतंत्रता की 75वीं जयंती आजादी का पैगाम ले आई।

स्वतंत्रता दिवस समारोह की खुशियों के बीच सतना केंद्रीय जेल में सजा काट रहे 20 बंदियों को सजा माफी का लाभ मिला है। इनमें 18 बंदी ऐसे हैं जिन्हें अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा माफी का लाभ पाने वालों में छतरपुर की एक महिला भी है जिसे अपने पति के कत्ल के इल्जाम में उम्र कैद हुई थी।

सबसे ज्यादा छतरपुर जिले के कैदी रिहा

सोमवार को इन सभी 20 बंदियों को सतना के केंद्रीय कारागार से आजाद कर दिया गया। सबसे अधिक 8 बंदी छतरपुर के रिहा हुए हैं। जेल अधीक्षक ने उन्हें रिहाई देते वक्त बधाई दी और यह उम्मीद जताई कि वे अब कभी दोबारा गुनाह के रास्ते पर नहीं चलेंगे। उन्होंने सभी बंदियों के साथ तस्वीर भी खिंचवाई।

जिन बंदियों को सजा माफी का लाभ मिला उनमें 3 वर्ष की सजा पाने वाला जीतेंद्र उर्फ बिटलू कुशवाहा निवासी सतना और 5 वर्ष की सजा पाने वाला छतरपुर निवासी राजभइया सिंह भी शामिल है। इसी तरह उम्र कैद की सजा से मुक्त होने वालों में ओमप्रकाश साहू निवासी बांदा, राजू उर्फ रजाउर रहमान निवासी बालाघाट, नत्थू उर्फ बिटवा काछी निवासी पन्ना शामिल हैं।

सतना के 4 बंदी रामनारायण सिंह, रामकुमार साहू, दारा उर्फ राजेंद्र सिंह और रामनरेश कोल उर्फ नरेश, छतरपुर के बंटा उर्फ शिवराज अहिरवार, भैयन उर्फ जयराम यादव, भैयाराम यादव, सोलू राजा उर्फ वितुर सिंह, सुनील रजक, भलटू उर्फ ठाकुरदास यादव, गजेंद्र सिंह और महिला बंदी कौशिल्या पटेल की भी रिहाई हुई है। इनके अलावा कर्वी उप्र के राजू उर्फ राजेंद्र सिंह, लाला उर्फ हरिश्चंद्र गौड़ और मुसइया सिंह गौड़ भी आजादी के अमृत महोत्सव पर आजाद हुए हैं।

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