शुक्ला बरदाडीह में श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह में बोले युवराज स्वामी:जिसमें देव तत्व का वास वही वासुदेव

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नयागांव आश्रम के आचार्य युवराज स्वामी बद्री प्रपन्नाचार्य महाराज ने शुक्ला बरदाडीह में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं को देवकी और वासुदेव के नाम की व्याख्या की। कांग्रेस नेता राजभान सिंह द्वारा आयोजित कथा सप्ताह में श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण जन्म की कथा का रस पान कराते हुए कथा व्यास बदरी प्रपन्नाचार्य महाराज ने बताया कि जो देवताओं की हो कर जीवन जीती है वही देवकी है। वासुदेव के नाम की वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जिसमें देव तत्व का वास हो वही वासुदेव है।

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि कंस के कारागार में वासुदेव-देवकी के यहां भादो मास की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। उनका लालन-पालन नंद बाबा के घर में हुआ था। इसलिए नंद गांव में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। श्रीकृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध करके पृथ्वी को अत्याचार से मुक्त किया और अपने माता-पिता को कारागार से छुड़वाया।

देवकी व वासुदेव का अर्थ समझाते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति अगर विपरीत परिस्थितियों की बेड़ियों में भी जकड़े हों तो भगवान को खोजने के लिए उन्हें कहीं जाना नहीं पड़ता है। बल्कि भगवान स्वयं आकर उसकी सारी बेड़ी काटकर उसे संसार सागर से मुक्त करा दिया करते हैं। इस दौरान श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुन कर भाव विभोर हुए श्रद्धालुओ ने प्राकट्य महोत्सव मनाया। भजन संगीत पर भक्त नाचते झूमते उत्साह मनाते रहे। महिलाओं ने सोहर और बधाई गीत गाए।

भगवान को माखन मिश्री का भोग लगाया गया और प्रसाद वितरित किया गया। कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए महाराज श्री ने बताया कि हर मनुष्य के जीवन में छह शत्रु काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ व अहंकार हैं। जब हमारे अंदर के ये छह शत्रु समाप्त हो जाते हैं तो सातवें संतान के रूप में शेष जी, जो काल के प्रतीक हैं, वो काल फिर मनुष्य के जीवन में आना भी चाहे तो भगवान अपने योग माया से उस काल का रास्ता बदल देते हैं।

इस अवसर पर कथामृत का पान करने वालों में सेवादल प्रदेशाध्यक्ष चंद्रप्रकाश बाजपेयी, जिलाध्यक्ष सीधी ज्ञान सिंह चौहान, अभय सिंह रोली, पूर्व महापौर राजाराम त्रिपाठी, आनंद सिंह, राजेंद्र भदौरिया, सुरेंद्र सिंह परसवारा, अनिल सिंह राजा, आरबी सिंह, वीरेंद्र सिंह, आशीष प्रताप सिंह सुरदहा गढी,बरर्मेंद्र सिंह बराज, नरेंद्र सिंह मुन्नू परसवारा, राकेश प्रताप सिंह, पंकज तिवारी, सचिन सिंह विसेन, इंद्रजीत सिंह बबलू, प्रीतेन्द्र सिंह प्रीतू बाबा क़िला नागौद, संजय सिंह परसवारा, विजय सिंह करैया, मनोज परौहा, शिवा गुप्ता,मनीष पटेल, उर्मिला त्रिपाठी, मुरारी सज्जनपुर, विभोर सिंह, मृगेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह गहरवार, संजय सिंह, ब्रिगेडियर देवेंद्र सिंह कृपालपुर एवं डॉ यशवंत सिंह शामिल रहे।

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