जबलपुर। बीजेपी विधायक और खनन कारोबारी संजय पाठक के एक जज को फोन करने के मामले में हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले की जानकारी देते हुए एडवोकेट आर्यन उरमलिया ने बताया कि चीफ जस्टिस की बेंच में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए माना कि संजय पाठक ने जानबूझकर न्यायालय की अवमानना की है। सुनवाई के दौरान खुद विधायक ने कोर्ट में अपना एफिडेविट (हलफनामा) पेश कर कॉल करने की बात स्वीकार कर ली है।
एडवोकेट आर्यन उरमलिया के अनुसार, संजय पाठक ने अदालत में जो हलफनामा दिया है, उसमें कई अहम खुलासे हुए हैं। विधायक ने स्वीकार किया कि जज को कॉल करने के बाद उन्होंने उन्हें मैसेज भी किया। मैसेज के जरिए उन्होंने जज को अपनी पहचान भी बताई थी। हालांकि उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पाठक ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है।
मीडिया के सवालों पर पाठक ने साधी चुप्पी
सुनवाई के बाद जब मीडिया ने संजय पाठक से सवाल किए, तो वे काफी असहज नजर आए। उन्होंने कई सवालों का सीधा जवाब देने से परहेज किया। जब उनसे यह पूछा गया कि उनके फोन में जज का नंबर कैसे आया और उन्होंने यह नंबर कैसे सेव किया था, तो उन्होंने इस सवाल को पूरी तरह से टाल दिया।
पाठक बोले- अब सिर्फ दतिया चुनाव पर है फोकस
मीडिया से दूरी बनाते हुए संजय पाठक ने केवल इतना कहा कि उनका अब एकमात्र लक्ष्य आगामी दतिया चुनाव में जीत हासिल करना है। फिलहाल, पूरे मामले में कोर्ट के फैसले का इंतजार है।







